जमीनी विवाद किस तरह आपसी रिश्तों में दरार पैदा कर रहा है, इसकी एक कहानी नरपतगंज प्रखंड की सोनापुर पंचायत से सामने आई है। चांदनी देवी ने अपने भाई-बहनों पर पैतृक जमीन में उनके हिस्से की जमीन हड़पने और बिक्री किए जाने का आरोप लगाया है। मामला स्वर्गीय मोहन लाल साह की कुल 55 डिसमिल जमीन से जुड़ा है। उपलब्ध वंशावली के अनुसार जमीन के सात हिस्सेदार हैं और प्रत्येक हिस्से में करीब 7.85 डिसमिल जमीन आती है।
नरपतगंज। नरपतगंज प्रखंड की सोनापुर पंचायत में जमीन के बंटवारे और बिक्री को लेकर परिवार के बीच विवाद सामने आया है। चांदनी देवी का आरोप है कि स्वर्गीय मोहन लाल साह की जमीन में उनके हिस्से के साथ न्याय नहीं हुआ और निर्धारित हिस्से से कम जमीन उनके नाम बची है। मामले को लेकर उन्होंने अंचल कार्यालय नरपतगंज में आपत्ति भी दर्ज कराई थी। इसके बावजूद मोटेशन किए जाने का आरोप लगाया गया है।
ग्राम कचहरी सोनापुर के सरपंच पृथ्वी चंद दास द्वारा निर्गत वंशावली के अनुसार स्वर्गीय मोहन लाल साह के चार पुत्र और तीन पुत्रियां थीं। कुल 55 डिसमिल जमीन को सात हिस्सों में बांटने पर प्रत्येक हिस्सेदार के हिस्से में करीब 7.857 डिसमिल जमीन आती है। इसी हिस्सेदारी को आधार बनाकर जमीन की अलग-अलग बिक्री का विवरण सामने रखा गया है।
दिए गए विवरण के अनुसार भूपेंद्र साह ने 7.857 डिसमिल जमीन अधिकलाल साह के पक्ष में बिक्री की। इसी तरह विनोद साह ने भी 7.857 डिसमिल जमीन अधिकलाल साह को बेची। मनोज साह द्वारा 7.857 डिसमिल जमीन बिमला देवी के पक्ष में बिक्री किए जाने की बात कही गई है।
वहीं चांदनी देवी द्वारा अपने हिस्से की 5.893 डिसमिल जमीन धनिक लाल साह को बेचे जाने का विवरण बताया गया है। दूसरी पुत्री सुमित्रा देवी और तीसरी पुत्री मुलानी देवी की ओर से भी अलग-अलग जमीन बिक्री का विवरण सामने आया है। बताया गया है कि दोनों ने मिलकर 5.893 डिसमिल जमीन बिमला देवी को दी, इसके बाद 5.893 डिसमिल जमीन बिमला देवी को तथा 9.750 डिसमिल जमीन अंजली देवी के पक्ष में बिक्री किए जाने की बात सामने आई है।
बताए गए बिक्री विवरण में करीब चार डिसमिल जमीन का स्पष्ट हिसाब नहीं होने का दावा किया गया है। वहीं चांदनी देवी के अनुसार उनके हिस्से की करीब 1.964 डिसमिल जमीन शेष बचती है, जिसे लेकर विवाद चल रहा है।
चांदनी देवी का सवाल है कि यदि वंशावली के अनुसार सभी सात हिस्सेदारों का बराबर हिस्सा बनता है तो उनके हिस्से में अन्य हिस्सेदारों की तुलना में इतनी कमी क्यों आई। उनका यह भी कहना है कि उन्होंने अंचलाधिकारी नरपतगंज के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई थी। ऐसे में आपत्ति के बाद जमीन की वास्तविक स्थिति की नापी और जांच किस स्तर पर हुई, यह भी स्पष्ट होना बाकी है।
मामले में एक अन्य बिंदु पावरनामा और उसके आधार पर हुई जमीन की रजिस्ट्री से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि नवीन कुमार साह की मौजूदगी में उनकी जमीन उनकी बहन द्वारा बेची गई। इसको लेकर सवाल उठाया जा रहा है कि यदि नवीन कुमार साह स्वयं जमीन की रजिस्ट्री नहीं कर सकते थे तो बहन के नाम पावरनामा किस आधार पर बनाया गया और उसी पावरनामा के आधार पर रजिस्ट्री कैसे हुई। इस जमीन का मोटेशन भी किए जाने की बात कही गई है। पावरनामा, रजिस्ट्री और मोटेशन की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप हुई या नहीं, यह जांच का विषय है।
वहीं दूसरे पक्ष के नवीन कुमार साह ने मामले में कुछ भी बोलने से इनकार किया। फिलहाल विवाद से जुड़े दस्तावेज, वंशावली, बिक्री अभिलेख, पावरनामा और मोटेशन रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
